Monday, 4 January 2016

तेरे इश्क में



मयखानें ने भी आज रुसवा कर दिया,
जब उसे पता चला हमने खुद को तुमसे जुदा कर दिया,
मय ने भी नशे को अलविदा कर दिया या,
जब मैंने हाथ छोडा़ और तुझे फना कर दिया।

इतनी थीं मोहब्बत की बदनाम हो गई,
समन्दर थीं फिर भी गुमनाम हो गई,
मयखाने में क्या मिलती उसको पनाह,
ये तो तेरे नशे में सरेआम हो गई।

इक कशिश थीं, उसका नशा था,
पयमाने ने भी छलक के दम तोड़ा था,
हमारी रूसवाई जब जुदाई हो गई,
मय की भी मयखाने से लड़ाई हो गई।