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शहीदों को मेरा नमन

हाथ की मेहंदी ना उतरी, मंगलसूत्र उतारने होंगे, 
वीर शहीदों के इस हिस्से को अब मोर्चे सम्भालने होंगे,
नम आँखों में भी फक्र के निशान दिखाने होंगे,
जब कंगन टूटे और बन्जर नजारें होंगे।
वो लाल किसी के,  वो प्यार किसी के,
देश के लिए अपनो को अलविदा कहने का दम रखने वाले,
देश के सच्चे सपूत होंगे,
सर पर कफन बांध के घर से निकले थे वीर वो,
तिरंगे में लिपट के लौटने वाले,
वो भी किसी माँ के पूत होंगे।
नम आँखों ने दी एक मूक विदाई,
खामोशी में बस गर्व के तराने होंगे,
गर्व की हर गहराई में दर्द के अनकहे फसाने होंगे।
किसी ने अपनी औलाद खोई, किसी ने पिता की छाँव खोई,
एक कोने ने में तन्हा तस्वीर को निहारती, उन नम आँखों ने अपनी पहचान खोई,
गर्व से भरे सीने ने जब कंगन उतारे होंगे,
हर किसी के दिल में जले दुख के अंगारे होंगे।
खुद को मजबूत दिखाती, सबको गर्व महसूस कराती,
वो भी बन्द कमरे में फफक के रोई होंगी,
फिर अपने बेटे को देशभक्ति का पाठ पढ़ाकर, वो खुश होई होंगी,
सर उठा कर चलती होंगी,
उसके साथी थी की गौरव गाथा की अब बस्ती होंगी।
सब कुछ खोके भी बहुत कुछ पाया उसने,
बडे गर्व से वीर की गौरव गाथाओं को सुनाया उसने,
हर उस गौरव गाथा को मेरा नमन,
शहीद वीर की शहादत को मेरा नमन,
अपने जिगर के टुकडे को देश पर फना करने वाली हर माँ को मेरा नमन,
बहन पर मर मिटने वाले भाई को खोने वाली हर बहन को मेरा नमन,
अपने पिता की सिर्फ वीर गाथाएं सुन सकने वाले हर अबोध बालक को मेरा नमन।
वो अधूरी कहानी जिसका उस वीर से रिश्ता हैं रूहानी,
वो नम आँखें, वो दर्द में भी मुस्कुराते लब,
वो सूनी कलाइयां, वो खाली मांग,
हाथों में सुर्ख लाल महेंदी, वो सफेद साड़ी में लिपटी नार,
गर्व का करके श्रृंगार, गर्व की करती बौछार,
वो अपना सब कुछ खोकर भी फक्र  करने वाली हर वीर की वीरांगना को मेरा नमन।
देश के लिए जीने वाले हर वीर और उसके वीर परिवार को मेरा नमन।

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