दिल में अरमान बहुत बाकी हैं,
सपनों की उङान अभी बाकी हैं।
अब शुरू किया मैंने मेरा कारवान,
भीड़ में पहचान बनाना अभी बाकी हैं।
सपनों की उङान अभी बाकी हैं।
अब शुरू किया मैंने मेरा कारवान,
भीड़ में पहचान बनाना अभी बाकी हैं।
छोड़कर अपने सपने हजार,
सम्भाला अपना घर संसार,
उन अधूरे सपनो को,
देना आकार अभी बाकी हैं।पंख फहरा दिए अब मैंने,
सम्भाला अपना घर संसार,
उन अधूरे सपनो को,
देना आकार अभी बाकी हैं।पंख फहरा दिए अब मैंने,
कर रहीं हुं उड़ान की शुरूआत।
आसमान छूने चल पडी,
आसमान पाना अभी बाकी हैं।
आसमान छूने चल पडी,
आसमान पाना अभी बाकी हैं।
कहते हैं हर किसी को मुकम्मल जहाँ नही मिलता,
पर बिना उङे आसमान नहीं मिलता।
हैं यें मेरी उडान का अागाज,
एक मुकम्मल अंजाम अभी बाकी हैं।
योगिता अमित जोशी
हैं यें मेरी उडान का अागाज,
एक मुकम्मल अंजाम अभी बाकी हैं।
योगिता अमित जोशी
Leave a Reply